किसान संघर्ष: केंद्र ने फिर वार्ता को बुलाया, किसानों ने दो दिन टाला दिल्ली कूच

भारतीय सरकार ने फिर से किसानों के संघर्ष को समझने की कोशिश की है और इसके लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र टोमर ने किसानों से बातचीत के लिए वार्ता को बुलाया है। यह वार्ता 1 दिसंबर को होने वाली थी, लेकिन किसान संगठनों ने इसे दो दिन टाल दिया है। इस वार्ता के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं हुआ है।

किसान संघर्ष 2024

किसानों का आंदोलन अब लगभग तीन हफ्ते से चल रहा है और किसानों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच की थी। इसके बावजूद, अभी तक कोई संगठन और सरकार के बीच सहमति नहीं हुई है। किसानों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों को वापस ले ले और उन्हें नए कानूनों के बजाय पुराने कानूनों पर चर्चा करने की मांग है।

किसानों के इस आंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले भी बातचीत की कोशिशें की थी, लेकिन उन्हें संगठनों के नेताओं ने खारिज कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अपनी पूरी कोशिश की है कि किसानों के संघर्ष को समझें और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए उनसे बातचीत करें।

किसानों के इस आंदोलन के बारे में कई राजनीतिक दलों ने भी अपनी राय दी है। कांग्रेस पार्टी ने इसका समर्थन किया है और उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार को किसानों की मांगों को सुनना चाहिए और उन्हें उनकी मांगों के अनुसार कानूनों में संशोधन करना चाहिए। वहीं, भाजपा ने इसे एक राजनीतिक आंदोलन बताया है और कहा है कि केंद्र सरकार को अपने कानूनों पर पक्षपात नहीं करना चाहिए।

किसानों के इस आंदोलन की वजह से दिल्ली में बहुत सारी सड़कें बंद हो गई हैं और यहां के लोगों को बहुत ही तकलीफ हो रही है। इसके अलावा, किसानों के आंदोलन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। इसलिए, इस मुद्दे को जल्दी से जल्दी समाधान किया जाना चाहिए ताकि देश की विकास और आर्थिक स्थिति पर कोई असर न पड़े।

इस वार्ता के बाद किसान संगठनों के नेताओं ने उठाए जाने वाले मुद्दों को लेकर अपनी बातचीत को जारी रखने का फैसला किया है। वे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच को जारी रखेंगे और केंद्र सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार रहेंगे। इसके अलावा, किसान संगठनों ने अपनी आगामी कार्यवाही के बारे में भी बातचीत की है और इसे लेकर उन्होंने एक कार्ययोजना तैयार की है।

किसानों के संघर्ष को लेकर देश भर में बहुत ही गहरा विचारधारा बन गई है। कई लोगों को लग रहा है कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे को जल्दी से जल्दी समाधान करना चाहिए ताकि देश की विकास और आर्थिक स्थिति पर कोई असर न पड़े। वहीं, कुछ लोगों को लग रहा है कि किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार को अपने कानूनों में संशोधन करना चाहिए।

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