Bhasma Aarti: भस्म आरती और 14 झूलसे: दो आध्यात्मिक त्योहारों का महत्व 2024

Bhasma Aarti 2024

Bhasma Aarti: भस्म आरती में भरकी आग 2024

भस्म आरती एक प्रमुख हिंदू धार्मिक प्रथा है जो कि काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन शाम को आयोजित की जाती है। यह आरती खासकर भगवान शिव को समर्पित है और उनके प्रशंसा के लिए समर्पित होती है। भस्म आरती का आयोजन काशी विश्वनाथ मंदिर के आद्यत्मिक माहौल में किया जाता है और यह एक अद्वितीय और आकर्षक धार्मिक अनुभव प्रदान करता है।

भस्म आरती का आयोजन हर शाम सूर्यास्त के बाद किया जाता है। इस आरती के लिए एक विशेष स्थान पर भस्म आग जलाई जाती है। यह आग भगवान शिव को समर्पित होती है और उनकी प्रशंसा के लिए उपयोग होती है। भस्म आरती के दौरान पुजारी ब्राह्मण भस्म से शिवलिंग को अभिषेक करते हैं और मंदिर के आस-पास घूमते हैं। इसके बाद, भस्म आग को जलाने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अनुसरण की जाती है।

14 झूलसे

14 झूलसे एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान कृष्ण के बचपन की यादों को ताजगी देता है और उनके भक्तों को आनंद और आनंद प्रदान करता है।

14 झूलसे के दौरान, भगवान कृष्ण की मूर्ति को एक स्विंग में बिठाया जाता है और उन्हें देवी राधा के साथ झूलने का आनंद लिया जाता है। इस तरह, भगवान कृष्ण के जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को याद किया जाता है और उनके भक्तों को उनकी दिव्य लीलाओं का आनंद मिलता है।

भस्म आरती और 14 झूलसे का महत्व

भस्म आरती और 14 झूलसे दोनों ही हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहार हैं जो भगवान की प्रशंसा और उनके दिव्य लीलाओं को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। ये दोनों त्योहार भक्तों को आध्यात्मिकता के आनंद का अनुभव कराते हैं और उन्हें संसारिक माया से मुक्ति की ओर ले जाते हैं।

भस्म आरती के द्वारा, भगवान शिव की प्रशंसा की जाती है और उनके आद्यात्मिक गुणों का अनुभव किया जाता है। यह आरती भक्तों को शांति और सुख का अनुभव कराती है और उन्हें उनके आध्यात्मिक सफर में मदद करती है।

दूसरी ओर, 14 झूलसे भगवान कृष्ण की प्रशंसा की जाती है और उनके बचपन की यादों को ताजगी देती है। यह त्योहार भक्तों को भगवान कृष्ण की लीलाओं का आनंद लेने का अवसर प्रदान करता है और उन्हें उनके आध्यात्मिक सम्पन्नता की ओर ले जाता है।

इन दोनों त्योहारों का महत्वपूर्ण अंश यह है कि वे भक्तों को आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ये त्योहार भक्तों को भगवान की कृपा और आशीर्वाद का अनुभव कराते हैं और उन्हें उनके आध्यात्मिक सफर में सहायता प्रदान करते हैं।

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