What is Guru Purnima 2022 | With Full Best information in Hindi

Guru Purnima
Guru Purnima

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है |

इस बार गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई को मनाया जा रहा है |(Guru Purnima (गुरु पूर्णिमा) 2022)

Why is Guru Purnima celebrated? (गुरु पूर्णिमाँ क्यों मनाई जाती है) 2022

यदि ईश्वर आपको श्राप दें तो इससे गुरु आपकी रक्षा कर सकते है

परन्तु गुरु श्राप से स्वयं ईश्वर भी आप को नहीं बचा सकते है |

Kabir ji says (कबीर जी कहते है)

गुरु गोविन्द दोनों खरे, काके लागू पॉव |

बलिहारी गुरु आपनो, गोविन्द दियो बताय ||

Why Guru Purnima (गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु में ही क्यों मनाया जाता है)

इन चार माह में न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी होती है |

यह समय अध्ययन और अध्यापन के लिए अनुकूल व् सर्वश्रेष्ट है |

Importance of guru poornima (गुरु पूर्णिमा का महत्व)

गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुओ की पूजा करने का विशेष महत्व है.

गुरुओ की पूजा करना इसलिए भी जरुरी है क्योकि उनकी कृपा से व्यक्ति कुछ भी हासिल कर पाता है |

What does guru mean (गुरु का अर्थ क्या होता है)

शास्त्रों में गु का अर्थ अंधकार या मूल अज्ञान और रु का अर्थ उसका निरोधक,

अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है |

Who was the first guru (सबसे पहले गुरु कौन थे)

पुराणों के अनुसार, भगवान शिव सबसे पहले गुरु माने जाते है | शनि और परशुराम इनके दो शिष्य है |

Importance (महत्व)

गुरु के बिना एक शिष्य के जीवन का कोई मोल नहीं रहता  है |

रामायण से lekar  महाभारत तक गुरु का स्थान सबसे सर्वोच्च  और महत्व पूर्ण रहा है |

महँ संत कबिरदाश ने गुरु के महत्ता को देखते हुए ही लिखा है | 

                      गुरु गोबिंद दोनों खरे, काके लागु पाव |

                     बलिहारी guru आपनो , गोविंद दियो बताय ||

यनि -एक गुरु का स्थान भगवान से भी कई गुना ज्यादा बड़ा होता है |

महर्षि वेद व्यास के जन्मदिवस को हम गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते है |

महर्षि व्यास जी ऋषिपराशर के पुत्र थे | 

शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास को तिन कालो का ज्ञाता माना जाता है |

इनके नाम के पीछे भी एक कहानी है | ऐसा माना  जाता है

की महर्षि जी ने वेद को भी अलग – अलग बाँट कर इनका नाम  ऋंग वेद , यजुर्व वेद , साम वेद , तथा अथर्व वेद  दिया

| वेदों का इस प्रकार से विभाजन के कारन ही वे वेद व्यास कहलाये | 

  • एक गुरु ही है  जो अपने शिष्य को गलत मार्ग पे जाने से रोकता है
  • या गलत मार्ग से हटा के सही मार्ग पर लाता है | 
  • पौराणिक क़ाल से सम्बंधित ऐसी बहुत सी कथाएं सुनने को मिलते है |
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  • जिससे ये पता चलता है की किसी भी व्यक्ति के महँ बनने के
  • पीछे गुरु का विशेस योगदान रहा है | 

Puja method of Guru Poornima (गुरु पूर्णिमा के पूजा बिधि)

  • गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह सवेरे स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करे |
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  • घर के मंदिर में किसी चौकी पर सफ़ेद वस्त्र बिछाकर उस पर 12-12 रेखाए बनाकर व्यास पीठ बनाये | 
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  • “गुरुपरंपराशिध्यर्थ व्यास पूजा करिष्ये”  मन्त्र का जाप करें |
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  • अपनी गुरु या उनकी फोटो की पूजा करें |
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  • अगर गुरु के सामने हो आप तो उनके चरण धोये उन्हें तिलक लगाये और फूल अर्पण करे | 
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  • उन्हें भोजन कराये |
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  • अपने गुरु को कुछ उपहार भी देना चाहिए |
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  • इनके चरण छूकर इन्हें बीदा करें |